News –  coronavirus affects चीन के वुहान में वायरस का पहला मामला आने के तीन महीने बाद दुनियाभर में इससे 7,500 लोगों की मौत हो गई हैं। करीब 160 से अधिक देश कोरोना वायरस की चपेट में आ गए हैं। लाखों की संख्या में लोग इससे संक्रमित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोरोना वायरस COVID-19 को महामारी घोषित कर दिया है।

चाइनीज़ सेंटर्स ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल ने इस पर अध्ययन किया है और जो भी जानकारी मिली है वो इसी अध्ययन से है.

कोरोना वायरस से संक्रमित जिन 44 हज़ार लोगों पर ये अध्ययन किया गया उनमें से 2.8 प्रतिशत पुरुषों की और 1.7 प्रतिशत महिलाओं की मौत हुई है। उम्र की बात करें तो जहां वायरस से संक्रमित 0.2 प्रतिशत बच्चे और किशोरों की मौत हुई है वहीं 80 साल से ज़्यादा उम्र के 15 प्रतिशत लोगों की मौत हुई है।  क्या इन आंकड़ों के ये मायने हैं कि महिलाओं और बच्चों को कोरोना वायरस होने का डर कम है।

क्यों है, महिलाओं और बच्चों की तुलना में पुरुषों को कोरोना वायरस का ख़तरा

coronavirus affects

coronavirus affects एक वजह तो ये हो सकती है कि महिलाओं और बच्चों में संक्रमण कम होता है या उनका शरीर इस वायरस से बेहतर तरीक़े से लड़ सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ़ एक्सटर से डॉक्टर भरत पनखनिया कहते हैं, “अमूमन जो भी नया वायरस आता है उससे हर कोई संक्रमित हो जाता है. ये बात सबसे महत्वपूर्ण है.”

इसका कारण ये है कि किसी में भी उस वायरस से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती। हालांकि, जब कोई वायरस फैलना शुरू होता है तो बच्चे उससे कम संक्रमित होते हैं। किंग्स कॉलेज लंदन के डॉक्टर नथालिए मैकडरमेट बताते हैं, “बच्चों में संक्रमण कम होने के पीछे एक कारण ये हो सकता है कि माता-पिता बच्चों को ज़्यादा सुरक्षित रखते हैं. उन्हें संक्रमण के ख़तरे से बचाते हैं.”

गर्भावस्था में कितना ख़तरा

आधिकारिक रूप से इसका जवाब ना है, लेकिन विशेषज्ञों में इसे लेकर संदेह है। गर्भावस्था में शरीर में बहुत कुछ होता है. जैसे इस दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली भी कमज़ोर हो जाती है और इससे शरीर भ्रूण को गर्भाशय में स्वीकार कर पाता है.

लेकिन, इससे महिलाओं को संक्रमण होने का ख़तरा भी बढ़ जाता है. समान उम्र की अन्य महिलाओं के मुक़ाबले गर्भवती महिलाओं की फ्लू से मौत होने की आशंका ज़्यादा होती है।

ब्रिटेन की सरकार का कहना है कि इस बात के “कोई स्पष्ट संकेत नहीं है” कि गर्भवती महिलाएं कोरोन वायरस से ज़्यादा गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं।

प्रोफ़ेसर हंटर कहते हैं, “मुझे इस पर पूरी तरह भरोसा नहीं है. यह सिर्फ़ नौ गर्भवती महिलाओं से मिले आंकड़ों पर आधारित है इसलिए मुझे ये कहना ठीक नहीं लगता कि सबकुछ ठीक है. अगर मेरी पत्नी की बात करें तो मैं उन्हें सावधानी बरतने, हाथ धोने और ध्यान रखने के लिए कहूंगा.”

बच्चों में कोरोना वायरस

coronavirus affects बच्चों को कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है. अभी तक का सबसे कम उम्र का मामला, एक दिन के बच्चे का है।बच्चों में कोविड-19 के लक्षणों के बारे में बहुत कम जानकारी प्राप्त हुई है लेकिन लक्षण हल्के-फुल्के होते हैं जैसे बुख़ार, नाक बहना और खांसी।

छोटे बच्चे भी इससे बीमार हो सकते हैं. फ़्लू के मामले में भी यही होता है जिसमें पाँच साल से कम उम्र (ख़ासतौर पर दो साल से कम) के बच्चों को ख़तरा ज़्यादा होता है। डॉक्टर पनखनिया कहते हैं, “लोग उम्र बढ़ने पर ज़्यादा बीमार हो जाते हैं क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है.”

उम्रदराज़ लोगों में या पहले से ही कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता व गंभीर अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में ज़्यादा संक्रमण पाया गया है। उन्हें इसका ज़्यादा ख़तरा होगा. लेकिन, बच्चों में वायरस का असर हल्का ही पाया गया है।

हर्ड इम्युनिटी थ्योरी 

‘हर्ड इम्युनिटी थ्योरी’ के बारे में बात करते हुए कि ब्रिटेन ने कथित तौर पर इस बीमारी से लड़ने के लिए इसे शामिल किया है, गुलेरिया ने कहा कि हालांकि कुछ देश  ‘हर्ड इम्युनिटी’ थ्योरी को अपना रहे हैं, लेकिन परिणाम बहुत कठोर हो सकते हैं। हर्ड इम्युनिटी का मतलब है कि 60 प्रतिशत आबादी जो स्वस्थ है और कम जोखिम पर है, देश उन्हें संक्रमण प्राप्त करने और अपनी स्वयं की प्रतिरक्षा से उबरने की अनुमति देता है।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here