ये कुछ महत्वपूर्ण सेंसर हैं जो लगभग सभी तरह के स्मार्टफोन में इस्तेमाल होते हैं

smartphone sensors – आजकल लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका स्मार्टफोन, एक ऐसा डिवाइस है जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कई कार्यों को आसान बना देता है। आंकड़ें जुटानेवाली वेबसाइट ‘स्टैटिस्टा’ के मुताबिक भारत में 2020 तक करीब 41 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स हो सकते हैं। ऐसे में स्मार्टफोन रखना लोगों के लिए आम हो गया है।

आज हम आपको स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले सेंसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आपके स्मार्टफोन में मौजूद कई तरह के ऐप्स आसानी से काम करते हैं। मान लीजिए, अगर आपने कम्पास नाम का ऐप अपने स्मार्टफोन में इंस्टाल कर लिया तो वो आपको सही दिशा बताने लगता है। क्या आप जानते हैं कि ऐसा कैसे संभव हो पाता है? ऐसा आपके स्मार्टफोन में मौजूद सेंसर की वजह से ही संभव हो पाता है।

ये कुछ महत्वपूर्ण सेंसर हैं जो लगभग सभी तरह के स्मार्टफोन में इस्तेमाल होते हैं

smartphone sensors

प्रोक्सिमिटी सेंसर (निकटता पता लगाने वाला सेंसर)

smartphone sensors – जब कोई वस्तु स्मार्टफोन के पास होता है तो यह सेंसर उसकी मौजूदगी के बारे में पता लगा लेता है। यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन के ऊपरी वाले हिस्से में सेल्फी कैमरे के पास लगा होता है। यह सेंसर आमतौर पर जब आप कोई कॉल आने पर या कॉल करने के लिए अपने स्मार्टफोन को अपने कान के पास ले जाते हैं तो यह सेंसर आपके स्मार्टफोन के डिस्प्ले की लाईट को स्वत: ऑफ कर देता है।

 

एक्सीलरोमीटर और गिरोस्कोप सेंसर (रोटेशन के लिए इस्तेमाल होने वाला सेंसर)

smartphone sensors – यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन किस दिशा में घूमा हुआ है उसके बारे में बताता है। जब भी आप कोई वीडियो अपने स्मार्टफोन में देख रहे होते हैं तो आप उसे प्रोट्रेट मोड की जगह लैंडस्केप मोड में देखना पसंद करते हैं ताकि, वीडियो फुल स्क्रीन पर देख सकें। इसके लिए जैसे ही आप अपने स्मार्टफोन को लैंडस्केप मोड में घुमाते हैं स्मार्टफोन में चल रहे वीडियो का ओरिएंटेशन भी लैंडस्केप हो जाता है। ध्यान रहे यह सेंसर तभी काम करता है जब आपके स्मार्टफोन में ऑटो-रोटेशन इनेबल किया हो।

अगर आप अपने स्मार्टफोन में रोटेशन को लॉक कर देते हैं तो यह सेंसर काम नहीं करता है। इसे एक्सीलरोमीटर और गिरोस्कोप सैंसर इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्मार्टफोन के रोटेशन के लिए दो सेंसर की जरूरत होती है जिसमें एक्सीलरोमीटर इसके रेखीय त्वरण (लिनियर एक्सीलरेशन) को जबकि गिरोस्कोप इसके घूर्णी कोण (रोटेशन एंगल) के गति को निंयत्रित करता है। एक्सीलरोमीटर सेंसर का इस्तेमाल कई स्वास्थ संबंधित ऐप के लिए भी किया जाता है।

 

डिजिटल कम्पास

smartphone sensors – इसमें मैगनेटोमीटर सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है जो धरती के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार काम करता है। इस सेंसर की मदद से स्मार्टफोन में इंस्टाल डिजिटल कम्पास सही दिशा के बारे में जानकारी देता है।

 

बैरोमीटर

smartphone sensors – यह सेंसर मूल रूप से स्मार्टफोन में लगे इनबिल्ट जीपीएस चिप की मदद से काम करता है। इसकी मदद से ऊंचाई पर त्वरित गति से स्थान को लॉक करके डाटा इकठ्ठा किया जा सकता है। यह सेंसर मूल रूप से स्वास्थ्य ऐप में इस्तेमाल होता है, जिसकी मदद से आप कितनी ऊंचाई पर हैं इसके बारे में जानकारी मिलती है

 

बॉयोमैट्रिक सेंसर

smartphone sensors – इसका इस्तेमाल आजकल लगभग सभी तरह के मिड रेंज और हाई रेंज के स्मार्टफोन में किया जाता है। इसकी मदद से स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए फिंगरप्रिंट सेंसर के रूप में काम किया जाता है। यह सेंसर स्मार्टफोन में दर्ज किए गए अंगूठे या उंगली को स्कैन करके डाटा इकठ्ठा कर लेता है, फिर दूसरी बार अगर उसी अंगूठे या उंगली को इस सेंसर के पास रखा जाता है तो वो इसकी जानकारी को इकठ्ठा किए गए जानकारी मे मिलाकर सही अंगूठे या उंगली की पहचान कर लेता है।

smartphone sensors – भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के आधार ऐप के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बॉयोमैट्रिक डाटा के लिए भी इसी सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है। बॉयोमैट्रीक सेंसर में फिंगरप्रिंट के अलावा रेटीना स्कैनर भी आता है जो सेल्फी के लिए इस्तेमाल होने वाले कैमरे के साथ जुड़ा होता है जिसकी मदद से स्मार्टफोन के लॉक को रेटिना के स्कैन की मदद से भी लॉक-अनलॉक किया जा सकता है। इसके अलावा इस सेंसर की मदद से हार्ट रेट को भी मापा जा सकता है जो कई तरह के हार्ट रेट मापने वाले ऐप के साथ काम करता है। बॉयोमैट्रिक सेंसर का इस्तेमाल स्मार्टफोन के कई तरह के ऐप के लिए किया जाता है।

 

एंबीएंट लाईट सेंसर

smartphone sensors – यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की ब्राइटनेस को कमरे की रोशनी के हिसाब से एडस्ट करने में मदद करता है। यह सेंसर डिस्प्ले की ब्राइटनेस को स्वत: कम या ज्यादा करने में मदद करता है।

 

वर्चुअल रियलिटी सेंसर

smartphone sensors – स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले सभी सेंसर स्मार्टफोन के सीपीयू (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) और जीपीयू (ग्राफिकल प्रोसेसिंग यूनिट) के साथ मिलकर सटीक डाटा इकठ्ठा करने में मदद करता है। वर्चुअल रियलिटी सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन के कैमरे के साथ मिलकर वास्तविकता वाले ऐप के साथ काम करता है। यह सेंसर स्मार्टफोन में कैमरे वाले ऐप की मदद से एनीमेटेड तस्वीर भी निकाल सकता है।

जैसा कि आजकल युवाओं में विभिन्न तरह के एनीमेटेड फेस वाली तस्वीर निकालने का प्रचलन है वो इस सेंसर की मदद से ही संभव हो पाता है। यह सेंसर कई तरह के मोबाइल गेम्स खेलने में भी मदद करता है। कई तरह के मोबाइल गेम्स में वर्चुअल कैरेक्टर होते हैं जो इस इस सेंसर की मदद से बनाए जा सकते हैं और आप मोबाइल गेम्स का लुफ्त उठा सकते हैं।

 

जीपीएस सेसर

smartphone sensors – जीपीएस सेंसर आमतौर पर सभी स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जाने वाला सेंसर है। जीपीएस का मतलब होता है ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी की भूमंडलीय स्थिति निर्धारण प्रणाली। इस सेंसर की मदद से डिवाइस की लोकेशन पता करने में मदद मिलती है। ये सेंसर कई तरह के सैटेलाइट के साथ जुड़कर बता सकता है कि आप इस समय कहां हैं। ये तब काम नहीं करता है जब आप इंडोर में या बेसमेंट में मौजूद होते हैं और घने बादल लगे होते हैं क्योंकि इसके सेंसर को सैटेलाइट से जुड़ने में ये लेयर मुश्किलें पैदा करती हैं। साथ ही जीपीएस सेंसर स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्टिविटी होने पर ही काम करता है।

यानी कि अगर आपके स्मार्टफोन में इंटरनेट डाटा बंद होता है तो यह सेंसर काम नहीं करता है। जीपीएस सेंसर इंटरनेट डाटा पर काम करता है जिसकी वजह से स्मार्टफोन आपको फोन की बैटरी के ज्यादा इस्तेमाल होने की वार्निंग देता है। जीपीएस सेंसर स्मार्टफोन के बैटरी को जल्दी डिस्चार्ज कर देता है लेकिन इस सेंसर की मदद से ही कई तरह के लोकेट करने वाले ऐप आपके स्मार्टफोन में काम करते हैं। अगर आपका स्मार्टफोन कहीं गुम हो जाता है तो जीपीए ट्रैकर की मदद से ही आपके स्मार्टफोन को लोकेट करने में मदद मिलती है।

 

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