किस कारण से खत्म हुई सिंधु घाटी सभ्यता और इससे जुड़े तथ्‍य

(indus valley civilization) – 900 साल सूखे के कारण खत्म हुई सिंधु घाटी सभ्यता – दुनिया की सबसे प्राचीन और विकसित माने जाने वाली सभ्यताओं में से एक है। सिंधु घाटी सभ्यता के आसपास अन्य नदी घाटी सभ्यताएं भी थीं। बाकी नदी घाटी सभ्यताओं के खत्म होने को लेकर अब तक वैज्ञानिक एकमत हैं, लेकिन सिंधु घाटी सभ्यता किस वजह से खत्म हुई इसको लेकर इतिहासकार और वैज्ञानिक एकमत नहीं हैं। कुछ ने सूखे को तो कुछ भयंकर बाढ़ को तो कुछ बाहरी आक्रमण को सिंधु घाटी सभ्यता के खत्म होने की वजह मानते हैं। कुछ वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को भी एक वजह माना है। इसमें जलवायु परिवर्तन की वजह से हुए सूखे को सिंधु घाटी सभ्यता के खत्म होने की मान्यता सबसे अधिक प्रचलित है, लेकिन इस सूखे की अवधि को लेकर कोई आम राय कायम नहीं हो पाई थी।

indus valley civilization

 

क्यों किया लोगो ने इन घाटियों से पलायन

दौरान मॉनसून के पैटर्न का अध्ययन किया और पाया कि लगभग 900 साल तक उत्तर पश्चिम हिमालय में बारिश न के बराबर हुई। इस कारण सिंधु और इसकी सहायक नदियां जो बारिश से सालों भर भरी रहती थीं, सूख गईं। इन नदियों के किनारे ही सिंधु घाटी सभ्यता अस्तित्व में थी। नदियों में पानी खत्म होने से लोग पूर्व और दक्षिण की ओर गंगा-यमुना घाटी की ओर चले गए जहां बारिश बेहतर होती थी। यह जैसे जैसे सूखा पड़ने लगा। तो यह के लोग इन इलाकों से पलायन करने लगे। इन घाटियों से पलायन कर रहे लोग गंगा-यमुना घाटी की ओर और बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, विंध्याचल और गुजरात जाने लगे।

 

कैसे बनी सिंधु घाटी सभ्यता(indus valley civilization)

सिंधु घाटी सभ्यता प्राचीन सभ्यताओं में सबसे ज्यादा भूभाग में फैली हुई थी. इसके तहत करीब 15 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र था जहां इस समय भारत, पाकिस्तान, बलूचिस्तान और अफगानिस्तान बसे हैं. इस सभ्यता में बेहद विकसित आधारभूत ढांचा, वास्तुकला व मेटलर्जी यानि धातु विज्ञान मौजूद था और विश्व की अन्य तत्कालीन सभ्यताओं के साथ उसके व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध थे. सिंधु और इसकी सहायक नदियों रावी, चिनाब, व्यास और सतलज के किनारे बसने के कारण ही इस सभ्यता का नाम सिंधु घाटी सभ्यता पड़ा था, लेकिन इसके निशान तटीय गुजरात और राजस्थान तक में मिलते हैं। इस वजह से इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी पुकारा जाने लगा। हड़प्पा में ही इस सभ्यता के अवशेष सबसे पहली बार मिले थे।

 

लोग करते थे यह व्यापार

मिट्टी के बर्तन बनाने में ये लोग बहुत कुशल थे। मिट्टी के बर्तनों पर काले रंग से भिन्न-भिन्न प्रकार के चित्र बनाये जाते थे। कपड़ा बनाने का व्यवसाय उन्नत अवस्था में था। उसका विदेशों में भी निर्यात होता था।

यहां के लोग आपस में पत्थर, धातु शल्क (हड्डी) आदि का व्यापार करते थे। एक बड़े भूभाग में ढेर सारी सील (मृन्मुद्रा), एकरूप लिपि और मानकीकृत माप तौल के प्रमाण मिले हैं। वे चक्के से परिचित थे और संभवतः आजकल के इक्के (रथ) जैसा कोई वाहन प्रयोग करते थे। ये अफ़ग़ानिस्तान और ईरान (फ़ारस) से व्यापार करते थे। उन्होंने उत्तरी अफ़गानिस्तान में एक वाणिज्यिक उपनिवेश स्थापित किया जिससे उन्हें व्यापार में सहूलियत होती थी।

 

सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी महत्‍वपूर्ण जानकारी और तथ्‍य(indus valley civilization)

  • सिंधु सभ्यता(indus valley civilization) की खोज रायबहादुर दयाराम साहनी ने की.

 

  • सिंधु सभ्यता को प्राक्ऐतिहासिक (Prohistoric) युग में रखा जा सकता है.

 

  • इस सभ्यता के मुख्य निवासी द्रविड़ और भूमध्यसागरीय थे.

 

  • सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्थल सुतकांगेंडोर (बलूचिस्तान), पूर्वी पुरास्थल आलमगीर ( मेरठ), उत्तरी पुरास्थल मांदा ( अखनूर, जम्मू कश्मीर) और दक्षिणी पुरास्थल दाइमाबाद (अहमदनगर, महाराष्ट्र) हैं.

 

  • सिंधु सभ्यता सैंधवकालीन नगरीय सभ्यता थी.  सैंधव सभ्‍यता से प्राप्‍त परिपक्‍व अवस्‍था वाले स्‍थलों में केवल 6 को ही बड़े नगरों की संज्ञा दी गई है. ये हैं: मोहनजोदड़ों, हड़प्पा, गणवारीवाला, धौलवीरा, राखीगढ़ और कालीबंगन.

 

  • हड़प्पा के सर्वाधिक स्थल गुजरात से खोजे गए हैं.

 

  • लोथल और सुतकोतदा-सिंधु सभ्यता का बंदरगाह था.

 

  • जुते हुए खेत और नक्काशीदार ईंटों के प्रयोग का साक्ष्य कालीबंगन से प्राप्त हुआ है.

 

  • मोहनजोदड़ो से मिले अन्नागार शायद सैंधव सभ्यता की सबसे बड़ी इमारत थी.

 

  • मोहनजोदड़ो से मिला स्नानागार एक प्रमुख स्मारक है, जो 11.88 मीटर लंबा, 7 मीटर चौड़ा है.

 

  • अग्निकुंड लोथल और कालीबंगा से मिले हैं.

 

  • मोहनजोदड़ों से प्राप्त एक शील पर तीन मुख वाले देवता की मूर्ति मिली है जिसके चारो ओर हाथी, गैंडा, चीता और भैंसा थे.

 

  • हड़प्पा की मोहरों में एक ऋृंगी पशु का अंकन मिलता है.

 

  • मोहनजोदड़ों से एक नर्तकी की कांस्य की मूर्ति मिली है.

 

  • मनके बनाने के कारखाने लोथल और चन्हूदड़ों में मिले हैं.

 

  • indus valley civilization की लिपि भावचित्रात्मक है. यह लिपि दाई से बाईं ओर लिखी जाती है.

 

  • सिंधु सभ्यता के लोगों ने नगरों और घरों के विनयास की ग्रिड पद्धति अपनाई थी, यानी दरवाजे पीछे की ओर खुलते थे.

 

  • सिंधु सभ्यता की मुख्य फसलें थी गेहूं और जौ.

 

  • सिंधु सभ्यता को लोग मिठास के लिए शहद का इस्तेमाल करते थे.

 

  • रंगपुर और लोथल से चावल के दाने मिले हैं, जिनसे धान की खेती का प्रमाण मिला है.

 

  • सरकोतदा, कालीबंगा और लोथल से सिंधुकालीन घोड़ों के अस्थिपंजर मिले हैं.

 

  • तौल की इकाई 16 के अनुपात में थी.

 

  • सिंधु सभ्यता के लोग यातायात के लिए बैलगाड़ी और भैंसागाड़ी का इस्तेमाल करते थे.

 

  • मेसोपोटामिया के अभिलेखों में वर्णित मेलूहा शब्द का अभिप्राय सिंधु सभ्यता से ही है.

इससे जुड़े तथ्‍य

 

  • हड़प्पा सभ्यता का शासन वणिक वर्ग को हाथों में था.

 

  • सिंधु सभ्यता के लोग धरती को उर्वरता की देवी मानते थे और पूजा करते थे.

 

  • पेड़ की पूजा और शिव पूजा के सबूत भी सिंधु सभ्यता से ही मिलते हैं.

 

  • स्वस्तिक चिह्न हड़प्पा सभ्यता की ही देन है. इससे सूर्यपासना का अनुमान लगाया जा सकता है.

 

  • सिंधु सभ्यता के शहरों में किसी भी मंदिर के अवशेष नहीं मिले हैं.

 

  • सिंधु सभ्यता में मातृदेवी की उपासना होती थी.

 

  • पशुओं में कूबड़ वाला सांड, इस सभ्यता को लोगों के लिए पूजनीय था

  • स्त्री की मिट्टी की मूर्तियां मिलने से ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि सैंधव सभ्यता का समाज मातृसत्तात्मक था.

 

  • सैंधव सभ्यता के लोग सूती और ऊनी वस्त्रों का इस्तेमाल करते थे.

 

  • मनोरंजन के लिए सैंधव सभ्यता को लोग मछली पकड़ना, शिकार करना और चौपड़ और पासा खेलते थे.

 

  • कालीबंगा एक मात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल था, जिसका निचला शहर भी किले से घिरा हुआ था.

 

  • सिंधु सभ्यता के लोग तलवार से परिचित नहीं थे.

 

  • पर्दा-प्रथा और वैश्यवृत्ति सैंधव सभ्यता में प्रचलित थीं.

 

  • शवों को जलाने और गाड़ने की प्रथाएं प्रचलित थी. हड़प्पा में शवों को दफनाने जबकि मोहनजोदड़ों में जलाने की प्रथा थी. लोथल और कालीबंगा में काफी युग्म समाधियां भी मिली हैं.

 

  • सैंधव सभ्यता के विनाश का सबसे बड़ा कारण बाढ़ था.

 

  • आग में पकी हुई मिट्टी को टेराकोटा कहा जाता है.

 

  • भारत में गर्मी का मानसून ‘‘बेहद कमजोर’’ होने के कारण हुआ. आईआईटी खड़गपुर ने आज एक बयान में कहा कि इन सबके कारण खेती पर असर पड़ा.

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