Eid al Adha आज, जानिए- क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी

Eid al Adha

Hindi news –  Eid al Adha – इस्लाम धर्म में हर साल दो बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। एक ईद-उल-फित्र तो दूसरा ईद-उल-अजहा. ईद-उल-अजहा के मौके पर मुस्लिम धर्म में नमाज पढ़ने के साथ-साथ जानवरों की कुर्बानी भी दी जाती है। इस्लाम के अनुसार, कुर्बानी करना हजरत इब्राहिम की सुन्नत है, जिसे अल्लाह ने मुसलमानों पर वाजिब कर दिया है।

पूरे देश में आज यानी बुधवार को बकरीद मनाई जा रही है। दिल्ली की जामा मस्जिद में सुबह ईद की नमाज अदा की गई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देशवासियों को ईद की शुभकामनाएं दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा ईद-उल-जुहा के अवसर पर सभी देशवासियों विशेषकर हमारे मुस्लिम भाइयों और बहनों को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। इस विशेष दिन हम त्याग और बलिदान की भावना के प्रति अपना आदर व्यक्त करते हैं। आइए, अपने समावेशी समाज में एकता और भाइचारे के लिए मिलकर काम करें।

पीएम मोदी ने इद-उल-जुहा पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज हमारे समाज में करुणा और भाईचारे की भावना को गहरा कर दें।

 

ईद-उल-अजहा

बकरीद को अरबी में ‘ईद-उल-जुहा’ कहते हैं। इस्लामिक मान्यता के अनुसार हजरत इब्राहिम अपने पुत्र इस्माइल को इसी दिन खुदा के लिए कुर्बान करने जा रहे थे, तो अल्लाह ने, उनके पुत्र को जीवनदान दे दिया जिसकी याद में यह पर्व मनाया जाता है। अरबी में ‘बक़र’ का अर्थ है बड़ा जानवर जो जिबह किया (काटा) जाता हैईद-ए-कुर्बां का मतलब है ‘बलिदान की भावना’ और ‘क़र्ब’ नजदीकी या बहुत पास रहने को कहते हैं मतलब इस मौके पर इंसान भगवान के बहुत करीब हो जाता है। ईद-उल-फितर यानी मीठी ईद के बाद मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार बकरीद आता है। मीठी ईद के ठीक 2 महीने बाद बकरीद आती है। कुर्बानी का पर्व ‘बकरीद’ कई मायनों में खास है और एक विशेष संदेश लोगों को देता है।

ईद-उल-अजहा का जश्न 3 दिन तक बड़ी धूम से मनाया जाता है। इसी हिसाब से कुर्बानी का सिलसिला भी ईद के दिन को मिलाकर तीन दिनों तक चलता है. ईद के मौके पर बाजारों की रौनक देखने को बनती है।

 

इस्लाम में कुर्बानी का महत्व

Eid al Adha – इस्लाम में कुर्बानी का काफी महत्व है. कुरान में कई जगह जिक्र किया गया है कि अल्लाह ने करीब 3 दिनों तक हजरत इब्राहिम को ख्वाब के जरिए अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करने का हुक्म दिया था. हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को सबसे प्यारे उनके बेटे हजरत ईस्माइल थे।

 

Eid al Adha – इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार हजरत इब्राहिम पैगंबर थे। वह हमेशा बुराई के खिलाफ लड़े, उनके जीने का मकसद ही लोगों की सेवा करना था। 90 साल की उम्र तक उनकी कोई औलाद नहीं हुई तो उन्होने खुदा से इबादत की तब जाकर उन्हें बेटा इस्माईल की प्राप्ति हुई। उन्हें सपने में आदेश आया कि खुदा की राह में कुर्बानी दो। उन्होंने कई जानवरों की कुर्बानी दी, लेकिन सपने उन्हें आने बंद नहीं हुए। उनसे सपने में कहा गया कि तुम अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी दो, तब उन्होंने इसे खुदा का आदेश माना और अपने बेटे की कुर्बानी के लिए तैयार हो गए।

Eid al Adha – ऐसा कहा जाता है कि हजरत इब्राहिम को लगा कि कुर्बानी देते समय उनकी भावनाएं आड़े आ सकती हैं, इसलिए उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी लेकिन जब उन्होंने पट्टी खोली तो देखा कि मक्का के करीब मिना पर्वत की उस बलि वेदी पर उनका बेटा नहीं, बल्कि दुंबा था और उनका बेटा उनके सामने खड़ा था। विश्वास की इस परीक्षा के सम्मान में दुनियाभर के मुसलमान इस अवसर पर अल्लाह में अपनी आस्था दिखाने के लिए जानवरों की कुर्बानी देते हैं।

 

किन लोगों पर कुर्बानी वाजिब है

Eid al Adha – इस्लाम के मुताबिक, वह शख्स साहिबे हैसियत है, जिस पर जकात फर्ज है. वह शख्स जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या फिर साढ़े 52 तोला चांदी है या फिर उसके हिसाब से पैसे. आज की हिसाब से अगर आपके पास 28 से 30 हजार रुपये हैं तो आप साढ़े 52 तोला चांदी के दायरे में हैं. इसके मुताबिक जिसके पास 30 हजार रुपये के करीब हैं उस पर कुर्बानी वाजिब है. जो शख्स हैसियतमंद होते हुए भी अल्लाह की रजा में कुर्बानी नहीं करता है वो गुनाहगारों में शुमार है

 

कुर्बानी के हिस्से

Eid al Adha – कुर्बानी के लिए होने वाले जानवरों पर अलग-अलग हिस्से हैं। जहां बड़े जानवर ( भैंस ) पर सात हिस्से होते हैं तो वहीं बकरे जैसे छोटे जानवरों पर महज एक हिस्सा होता है। मतलब साफ है कि अगर कोई शख्स भैंस या ऊंट की कुर्बानी कराता है तो उसमें सात लोगों को शामिल किया जा सकता है। वहीं बकरे की कराता है तो वो सिर्फ एक शख्स के नाम पर होता है।

इस्लाम में कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से करने का हुक्म दिया गया  है, जिसमें एक हिस्सा गरीबों के लिए होता है। दूसरा हिस्सा दोस्त और रिश्तेदारों में तकसीम किया जाता है। वहीं, तीसरा हिस्सा अपने घर के लिए होता है।

 

कैसे जानवर की कुर्बानी की जाती है

Eid al Adha – इस्लाम में ऐसे जानवरों की कुर्बानी ही जायज मानी जाती है जो जानवर सेहतमंद होते हैं. अगर जानवर को किसी भी तरह की कोई बीमारी या तकलीफ हो तो अल्लाह ऐसे जानवर की कुर्बानी से राजी नहीं होता है।

 

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