नहीं रहा ‘तारक मेहता..’ का ये मशहूर एक्टर, दिल का दौरा पड़ने से निधन

मशहूर टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में डॉक्टर हंसराज हाथी का रोल निभाने  वाले एक्टर कवि कुमार आजाद का निधन हो गया है। एक्टर लंबे वक्त से इस शो में जुड़े हुए थे। एक्टर कवि कुमार आजाद की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई है। एक्टर की मौत से टीवी इंडस्ट्री को बहुत बड़ा झटका लगा है। मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक्टर ने 2010 में अपना 80 किलो वजन सर्जरी से कम किया था। इस सर्जरी के बाद उन्हें रोजाना की जिन्दगी में काफी आसानी हो गई थी।

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मुझे खुशी है कि लोगों ने मुझे मेरे किरदार के लिए पसंद किया।” बताने की जरूरत नहीं कि “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” की वजह से ही कवि कुमार आजाद की पहचान घर-घर में हुई। असित मोदी याद करते हुए बताते हैं, “कवि कुमार आजाद हमेशा खुश रहते थे। वे नो कम्प्लेंट शख्स थे. वे खुद डॉक्टर का रोल कर रहे थे वे खुद बीमार थे। उन्हें सेहत से जुड़ी ढेर सारी शिकायतें थीं लेकिन फिर भी मस्त रहते थे। जब भी मुझसे मिलते तो कहते, असित भाई की जय हो।

असित कुमार मोदी ने बोली यह बात

जब डॉ. हंसराज हाथ उर्फ कवि कुमार आजाद के निधन के बारे में ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के असित कुमार मोदी से बात की तो उन्होंने बताया, “कवि कुमार आजाद कमाल के एक्टर थे और बहुत ही सकारात्मक इंसान थे। उन्हें शो से बहुत ज्यादा प्यार था और अगर वे बीमार भी होते तो भी शूटिंग पर आते। आज सुबह उनका कॉल आया कि उनकी तबियत ठीक नहीं है और वे शूट पर नहीं आ सकेंगे। थोड़ा देर बाद ये बुरी खबर आ गई. हम लोग सदमे में हैं।

 

इस तरह होई थी शो में एंट्री

असित कुमार मोदी से जब पूछा गया कि उन्होंने डॉ. हाथी के कैरेक्टर के लिए उन्हें कैसे चुना तो उन्होंने बताया, “पहले डॉ. हाथी का किरदार कोई और कर रहे थे। लेकिन उनके साथ डेट्स की प्रॉब्लम थी। फिर मैंने ‘जोधा अकबर’ में कवि कुमार आजाद को देखा। चालू पांडेय ने मुझे कवि से मिलवाया. इस तरह हमने उन्हें इस रोल के लिए कास्ट कर लिया।

 

बॉलीवुड में भी हाथ आजमा चुके थे

कवि कुमार आजाद बॉलीवुड में भी हाथ आजमा चुके थे, और ‘मेला (2000)’ में नजर आए थे. इस फिल्म में उनके साथ आमिर खान भी थे। हालांकि कवि कुमार आजाद को असली पहचान ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ से मिली। कवि कुमार आजाद के नाम से ही जाहिर है कि वे कवि थे, और जब वे एक्टिंग में मशगूल नहीं होते तो कविताएं लिखा करते थे। शो में वे पूरी गोकुल धाम सोसाइटी के साथ बहुत ही मिलनसारिता के साथ पेश आते थे। ऑडियंस खासकर बच्चों में वे बहुत लोकप्रिय थे।

 

10 साल पहले ऑनएयर हुआ था शो

ये शो गुजराती में छपे एक कॉलम “दुनिया ने उन्धा चश्मा” (Duniya Ne Undha Chashma) का हिस्सा है। इसे पत्रकार तारक मेहता ने गुजराती की साप्ताहिक पत्रिका “चित्रलेखा” के लिए लिखा था। ये भारत में सबसे ज्यादा समय से चलने वाला स्क्रिप्टेड शो है. आज से 10 साल पहले 28 जुलाई 2008 में ये शो ऑन एयर हुआ था।

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